संगत और सीख
संगत और सीख
बोध कथा
एक सेठ अपने लड़के की बुरी संगत से
बेहद दुखी था। सेठ ने उसे बहुत समझाया पर
परिणाम कुछ नहीं निकला। परेशान सेठ उसे
अपने गुरुजी के पास लेकर गया और उन्हें
अपनी तकलीफ सुनाई।
गुरुजी ने सेठ के पुत्र का हाल -चाल पूछा
और उसे साथ लेकर एक बाग में गए। वहाँ
उन्होंने उसको विभिन्न प्रकार के पौधे दिखाए।
उनमें एक पौधा एक फुट का था, दूसरा तीन
फुट का, तीसरा छह फुट का और चौथा बारह
फूट का था।
गुरुजी ने कहा, 'पहले पौधे को उखाड़कर
दिखाओ।' लड़के ने पौधे को पकड़कर सहज
ही उखाड़ लिया। गुरुजी बोले, 'अब तुम दूसरे
पौधे को उखाड़कर दिखाओ।' लड़के ने उस
पौधे को भी जोर लगाकर उखाड़ दिया। तीसरे
पौधे को उखाड़ने में लड़के को दोनों हाथों से
काफी खींच-तान करनी पड़ी।
गुरुजी ने कहा 'अब चौथे पौधे को भी
उखाड़ कर लाओ' लड़के ने पौथे को दोनों
हाथों से पकड़ा काफी जोर लगाया, पर वह
नहीं उखड़ा।
लड़का बोला-' यह मुझसे नहीं उखडेगा।'
तब गुरुजी ने कहा, बेटे जब हम किसी बुरी
संगत में पड़ते हैं, तो शुरु में तो उसे दूर होना
आसान होता है, लेकिन जब हम उस संगत
को नहीं छोड़ते तो उसकी जड़े बहुत गहरी
हो जाती हैं, फिर उन्हें उखाडना मुश्किल हो
जाता है। लड़का समझ गया और उसी दिन से
उसने बुरे लोगों की संगत छोड़ दी।
Post a Comment